वाशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान पर बातचीत में देरी करने का आरोप लगाया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता था, लेकिन वार्ता को लगातार टाल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को कब समाप्त करना है, इसका फैसला अमेरिका अपने हिसाब से करेगा। वहीं, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों पर पलटवार करते हुए वाशिंगटन पर कूटनीतिक वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है।
ट्रंप बोले- समझौते में देरी से ईरान को फायदा नहीं होगा
टेक्सास में आयोजित रैलियों से लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार होने की बात कर चुका है, लेकिन बातचीत को आगे बढ़ाने के बजाय लगातार देरी कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि तेहरान किसी चुनाव या अन्य घटनाक्रम का इंतजार कर रहा हो सकता है, लेकिन इससे उसे कोई लाभ नहीं मिलने वाला।
ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने के समय को लेकर कहा कि इसका निर्णय वह खुद करेंगे। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संभावित समझौते और कूटनीतिक बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाए वादाखिलाफी के आरोप
ट्रंप के बयान पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए अमेरिका की कूटनीतिक नीति पर सवाल उठाए।
बघाई के मुताबिक, ट्रंप द्वारा इस्लामाबाद समझौते को लेकर अविश्वास जताना और उसे समय की बर्बादी बताना यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन के कूटनीतिक आश्वासनों पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का अपने वादों से पीछे हटना कोई नई बात नहीं है।
ईरानी प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय दायित्व अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं होते, तो वाशिंगटन उनसे दूरी बनाने लगता है। उन्होंने यूरोपीय देशों और अमेरिका का समर्थन करने वाले पक्षों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी देश के गलत आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और उसे जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देकर अमेरिका को घेरा
इस्माइल बघाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सुविधानुसार लागू नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, कूटनीतिक समझौतों और किए गए वादों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक बयानबाजी के जरिए किसी देश को उसकी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं किया जा सकता।
ईरान की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और तेहरान के बीच समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास दिखाई दे रहा है।
ट्रंप ने 1979 से ईरान पर संघर्ष जारी रखने का लगाया आरोप
इससे पहले टेक्सास के लुबॉक में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष की शुरुआत नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान वर्ष 1979 से अमेरिका के खिलाफ टकराव की राह पर है और इस दौरान अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी नेताओं की भी आलोचना की। उनका कहना था कि पिछले राष्ट्रपतियों को इस समस्या का समाधान काफी पहले तलाश लेना चाहिए था, लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं रहे।
ईरान के साथ संघर्ष कब समाप्त होगा, इस सवाल पर ट्रंप ने दोहराया कि अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा। उनके इस रुख से साफ है कि फिलहाल अमेरिकी प्रशासन अपनी शर्तों के आधार पर आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी ट्रंप ने दिया अपडेट
ईरान के अलावा ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में उनका प्रशासन लगातार प्रगति कर रहा है और जल्द ही एक बैठक आयोजित की जा सकती है।
हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच संभावित समझौते को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर ट्रंप ईरान पर वार्ता में देरी करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तेहरान अमेरिकी प्रशासन की मंशा और उसके कूटनीतिक रवैये पर सवाल उठा रहा है।